Thursday, February 27, 2025
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कालिदास के शाकुन्तलम पर नृत्य ने समां बांधा

कोलकाता ।  भारतीय भाषा परिषद की स्वर्ण जयंती आयोजन श्रृंखला में अमेरिका से आईं प्रसिद्ध नृत्यांगना लाबणी मोहन्ता के कालिदास के शाकुन्तलम पर नृत्य ने परिषद सभागार में दर्शकों का मन जीत लिया। तबला पर थे प्रसिद्ध वादक रोहेन बोस और सितार पर जयंत बैनर्जी। गायन पर अरिंदम भट्टाचार्य ने अनोखी प्रस्तुति दी। भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की संध्या पर दर्शकों की भारी उपस्थिति थी। परिषद की ओर से विमला पोद्दार, आशीष झुनझुनवाला, घनश्याम सुगला और शालीन खेमानी ने अतिथियों का स्वागत किया। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे रामनिवास द्विवेदी, प्रियंकर पालीवाल, सुनील कुमार शर्मा और महेंद्र सिंह पूनिया। आज के आयोजन के मुख्य संयोजक थे उदीयमान तबला वादक सौरभ गुहा। स्पेनिश वीणा पर थे सचिन पटवर्धन और घटम पर सोमनाथ राय। संगीत संध्या का संचालन करते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि परिषद की स्वर्ण जयंती पर हम कोलकाता में कई राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम करने जा रहे हैं। परिषद के निदेशक डा. शंभुनाथ ने कहा कि भारतीय कलाएं हमारे मन को व्यापक बनाती हैं और संगीत एक ईश्वरीय अनुभूति है। आशीष झुनझुनवाला ने धन्यवाद दिया।

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विद्यासागर विश्वविद्यालय और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा मातृभाषा दिवस का आयोजन
कोलकाता। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा ऑनलाइन काव्य संध्या का आयोजन किया गया। मिशन के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि भाषा माध्यम होती है और हम इसके सहयात्री होते है। मातृभाषा के साथ साहित्यिक पुनर्निर्माण का प्रश्न अपनी भाषा के साथ अन्य भाषाओं के बीच सृजनात्मक संवाद से ही संभव है। इस अवसर पर डॉ. सुशीला ओझा, डॉ. वर्षा महेश, दिव्या शर्मा, हिमाद्री, शिप्रा मिश्रा, सिपाली गुप्ता, मनीषा गुप्ता, मधु सिंह, सूर्य देव रॉय और सुषमा कुमारी ने काव्य पाठ किया। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि भाषा परिवेश की होती है। और आम तौर पर इसी परिवेश की भाषा को मातृभाषा कहा जाता है। आज मातृभाषा की पूरी परिपाटी बदल गई है। आजादी के बाद की तीसरी पीढ़ी के पास मातृभाषा के रूप में कमोबेश अंग्रेजी ही काबिज हो गई है। कार्यक्रम का सफल संचालन रुपेश यादव ने किया। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, मंजू रानी सिंह, नागेंद्र पंडित, विकास साव, डॉ. मंटू कुमार, उत्तम कुमार, शनि सरोज, महेश कुमार सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
हिंदी विभाग, विद्यासागर विश्वविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अर्जुन शर्की, बिट्टी कौर, निसार अहमद अंसारी व अन्य छात्र-छात्राओं ने मातृभाषा पर अपने विचार व्यक्त किए। विभाग के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न भाषाओं में गीत प्रस्तुत किए गए। माही कुमारी ने बंगला, अर्जुन शर्की ने नेपाली एवं अदिति ने हिंदी में गायन किया। अंजलि शर्मा, नेहा गुप्ता, माही कुमारी एवं अदिति शर्मा ने हिंदी गीत का सामूहिक गायन किया। नंदिनी सिंह एवं नगमा ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। विभाग के प्राध्यापक श्रीकांत द्विवेदी ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन रूथ कर ने किया।

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