‘वाग्मी-विद्वत्ता की प्रतिमूर्ति थे प्रो. कल्याणमल लोढ़ा और आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री’
कोलकाता । कलकत्ता विश्वविद्यालय के चन्द्रमुखी सभागार में हिन्दी विभाग के पूर्व आचार्य-द्वय प्रो. कल्याणमल लोढ़ा एवं आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री के भव्य चित्रों का अनावरण अनुष्ठान संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के अध्यापकीय कक्ष (प्रोफेसर्स रूम) की दीवार पर ये चित्र विभाग के ही पूर्व प्राध्यापक आचार्य ललिता प्रसाद सुकुल की प्रतिच्छवि के पार्श्व में स्थापित होंगे। हिन्दी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा भारतीय शिक्षण मंडल, दक्षिण बंग प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘हिन्दी आचार्य परम्परा और कलकत्ता विश्वविद्यालय’ विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की आचार्य परम्परा का भावपूर्ण स्मरण किया।महानगर के विशिष्ट हिंदी ग्रंथागार सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय की ओर से इन दोनों चित्रों को प्रदान किया संस्था के अध्यक्ष भरत जालान एवं मंत्री दुर्गा व्यास ने। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय की कार्यसमिति के दोनों दिवंगत सदस्यों की प्रतिच्छवि प्रदान करते हुए हमें आनंद और गौरव की अनुभूति हो रही है। कार्यक्रम की संयोजक, हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजश्री शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पितृपक्ष के अवसान और मातृपक्ष के आगमन के इस पवित्र समय पर यह आयोजन अपने पूर्व आचार्यों के प्रति कृतज्ञता निवेदन का लघु प्रयास है। उन्होंने इस कार्य के प्रेरक डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी एवं सौजन्य प्रदान करने वाले जालान पुस्तकालय के अध्यक्ष भरत जालान के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. राजश्री शुक्ला ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की सुदीर्घ आचार्य परम्परा का उल्लेख करते हुए हिन्दी विभाग के सभी आचार्यों के अवदान का स्मरण किया। समारोह के विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के अपने विद्यार्थी-काल को याद करते हुए प्रो. कल्याणमल लोढ़ा और आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री के अध्यापकीय कौशल और मनीषी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। डॉ. त्रिपाठी ने इन दोनों के साथ आचार्य ललिता प्रसाद सुकुल को ‘वाग्मी विद्वत्ता की विरल विभूति’ के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि ‘स्वाभिमानी हिन्दी साधक’ के रूप में सुकुलजी; हिन्दी की अस्मिता के संपोषक के रूप में प्रो. लोढ़ा तथा ‘विद्या ददाति विनयम्’ की प्रतिमूर्ति के रूप में आचार्य शास्त्री अविस्मरणीय हैं। अपने प्रभावी वक्तव्य में कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सत्या उपाध्याय ने प्रो. लोढ़ा एवं आचार्य शास्त्री के व्यक्तित्व-कृतित्व के विविध पक्षों का उल्लेख किया। उन्होंने आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री को भारतीय ज्ञान परम्परा के अधिकारी विद्वान के रूप में याद करते हुए उन्हें श्रेष्ठ अध्यापक, कर्मठ देशभक्त और सम्माननीय राजनेता बताया। कार्यक्रम का प्रारंभ शोधार्थी प्रियंका कुमारी सिंह के शक्ति मंत्र से हुआ तथा शोधार्थी प्रीतम रजक ने भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक एवं ध्येय वाक्य का पाठ किया। अतिथियों का स्वागत उत्तरीय, पुष्प गुच्छ और पुस्तक से डॉ. रामप्रवेश रजक, डॉ. अनूपा आर्या (मास्को यूनिवर्सिटी), श्लोक पाण्डेय, डॉ मनीषा त्रिपाठी ने किया । धन्यवाद ज्ञापन किया हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय के डॉ. राम प्रवेश रजक ने। शुभंकर मिश्र के कल्याण मंत्र वाचन से कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, जादव कृष्ण दास, डॉ. अनूपा आर्या, डॉ. शुभ्रा उपाध्याय इत्यादि प्राध्यापकों के अतिरिक्त शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों आदि की उपस्थिति रही।




