-मुआवजा देने से इनकार
लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से पहले ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए खुले मन से माफी मांगने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्लेव ट्रेड में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका के लिए माफी मांगने को तैयार है । हालांकि उन्होंने आर्थिक मुआवजे की संभावना को खारिज कर दिया है । बर्नहम ने शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को द गार्डियन में एक आर्टिकल में लिखा कि वे स्लेव ट्रेड के लिए भारत समेत 56 देशों से माफी मांगने के लिए तैयार है । ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उन लोगों के दर्द का एहसास है, जिन्होंने गुलामी और उससे जुड़ी क्रूरता को सहन किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक त्रासदी पर दुख जताते हुए कहा कि अतीत में किए गए अत्याचारों के निशान आज भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। बर्नहैम के मुताबिक, मुआवजा बांटना इस समस्या का उचित समाधान नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एक अन्याय के बदले दूसरे प्रकार का अन्याय करना सही नहीं होगा।
किंग चार्ल्स ने भी गुलामी के इतिहास का किया जिक्र
एंडी बर्नहैम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब किंग चार्ल्स कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। बहामास में अपने दौरे के दौरान उन्होंने गुलामी के इतिहास का उल्लेख किया और ब्रिटिश शासनकाल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। ब्रिटेन की ओर से इस मुद्दे पर अब तक औपचारिक माफी नहीं मांगी गई है। हालांकि, दास व्यापार के ऐतिहासिक प्रभाव और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। ब्रिटेन यह स्वीकार करता है कि ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार से देश को आर्थिक लाभ हुआ था। साथ ही, उसका यह भी कहना है कि बाद में इस व्यापार को समाप्त करने में ब्रिटेन ने भूमिका निभाई। वर्ष 1833 में ब्रिटिश संसद ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के लिए कानून पारित किया था। हालांकि, गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के बावजूद ब्रिटेन ने दूसरे देशों पर अपना औपनिवेशिक शासन जारी रखा और वहां के संसाधनों का दोहन करता रहा।




