नयी दिल्ली । रात में सात घंटे से कम सोने वालों को अब सर्तक रहने की जरुरत है, क्योंकि इससे आप हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के शिकार हो सकते हैं। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) के मेडिसिन विभाग के अध्ययन के मुताबिक रात को सात घंटे से कम नींद लेने वालों में हाई बीपी की संभावना 10 से 13 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इस अध्ययन का उद्देश्य 40 वर्ष से कम आयु के युवा वयस्कों में ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) के उतार-चढ़ाव पर नींद के प्रभाव का पता लगाना था, इसके लिए एलएचएमसी से संबद्ध अस्पताल की ओपीडी से ऐसे 60 प्रतिभागियों को चुना गया जो सामान्य रात्रि समय से अधिक नींद या कम नींद लेते हैं और जिनका हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का कोई इतिहास नहीं था। अध्ययन के लिए प्रतिभागियों को परिवर्तित निद्रा पैटर्न (सोने-जागने में अनियमितता बरतने) वाले और अपरिवर्तित निद्रा पैटर्न (नियमित समय पर सोने-जागने) वाले दो समूहों (30-30) में विभाजित किया गया। दोनों समूहों में शामिल लोगों के ब्लड प्रेशर (बीपी) के माप और दैनिक भिन्नताओं की जांच के लिए एम्बूलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (एबीपीएम) उपकरण का सहारा लिया गया। एबीपीएम के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की गई, जो दिन में प्रत्येक एक घंटे बाद और रात्रि में प्रत्येक 2 घंटे बाद प्रतिभागियों के बीपी के स्तर को माप कर रिकॉर्ड कर लेता था। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की नींद का पैटर्न बदल गया है, जागते समय उन के बीपी 120/80 एमएम एचजी के स्तर में 3-6 एमएम एचजी की वृद्धि हो गई है। वहीं, सोते समय उनके बीपी में 5-8 एमएम एचजी की वृद्धि हुई है यानि 24 घंटों में कुल मिलाकर 3-7 एमएम एचजी की वृद्धि दर्ज की गई।
इस अध्ययन को विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम प्रकाश के नेतृत्व में डॉ. मुकुल प्रसून, डॉ. रमेश अग्रवाल और डॉ. शुभलक्ष्मी मार्गेकर की टीम ने संपन्न किया है।
डॉ. अनुपम प्रकाश ने कहा कि ब्लड प्रेशर में 1 एमएम एचजी यानि एक अंक की वृद्धि, भले ही देखने में छोटी लगती है, लेकिन यह हार्ट डिजीज होने के खतरे को बढ़ा देती है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर (एचबीपी) हृदय संबंधी समस्याओं का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर, हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे समय के साथ एथेरोस्क्लेरोसिस (प्लाक का जमाव), कोरोनरी धमनी रोग, हृदय गति रुकना, दिल का दौरा और ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। हाई बीपी रीडिंग बढ़ने के साथ हृदय रोग का जोखिम लगातार बढ़ता जाता है, इसलिए बीपी में कोई भी वृद्धि चिंता का विषय है। डॉक्टर, इस अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग मरीजों को परामर्श देने के लिए कर सकते हैं और उन्हें ‘रक्तचाप नियंत्रण पर नींद के पैटर्न के प्रभाव’ के बारे में बता सकते हैं। साथ ही उन्हें स्वस्थ नींद की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
डॉ. प्रकाश ने कहा कि एक अन्य अध्ययन के मुताबिक सिस्टोलिक रक्तचाप में प्रत्येक 10 एमएम एचजी की कमी होने से प्रमुख हृदय रोग संबंधी घटनाओं का जोखिम 20 प्रतिशत, कोरोनरी हृदय रोग 17 प्रतिशत, स्ट्रोक 27 प्रतिशत, और हृदय गति रुकना 28 प्रतिशत कम हो गया, जिससे अध्ययन की गई आबादी में सर्व-कारण मृत्यु दर में 13 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। यानि खराब नींद के कारण बीपी का जो स्तर 3-7 एमएम एचजी बढ़ जाता है, वो अच्छी नींद लेने पर 10 एमएम एचजी तक कम या सामान्य भी हो सकता है और आप अपने शरीर को विभिन्न गंभीर रोगों से बचा सकते हैं। यानि आप जितना कम सोएंगे, भविष्य में आपको उच्च रक्तचाप होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।