Monday, March 9, 2026
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श्रृंगार में छिपा है हार्मोनल संतुलन का राज

सजना-संवरना हर एक महिला को खूब पसंद है। चाहे त्योहार हो या कोई खास मौका महिलाएं बनने-संवरने का कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। लड़कियों को मेकअप करने का भी काफी शौक होता है। बिंदी हो या फिर काजल व चूड़ियां आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सजने-सांवरने आपकी से सेहत का राज छिपा हुआ है। आपको यकीन नहीं हो रहा होगा, तो चलिए आपको बताते है कि, आयुर्वेदिक डॉक्टर के मुताबिक आपके श्रृंगार में सचमुच में हार्मोनल बैलेंस राज छिपा हुआ। आइए आपको बताते हैं श्रृंगार कैसे हार्मोन्स बैलेंस करता है।

– आयुर्वेद  के मुताबिक महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ का सीधा संबंध इनके नर्वस सिस्टम, बॉडी हीट और अपन वायु यानी उस एनर्जी के बैलेंस से होता है, तो पीरियड्स और रिप्रोडक्टिव बैलेंस के लिए जरूरी है।

– अगर आप श्रृंगार करती हैं तो आपको इन चीजों को बैलेंस करके हार्मोन्स हेल्थ को सुधार करता है। कुमकुम बिंदी माथे के अजन हिस्से में लगाई जाती है और इसकी वजह स्ट्रेस कम होता है और इमोशंस में उतार-चढ़ाव नहीं होता है। वहीं, यह तनाव को कम करके मेंस्ट्रुअल हेल्थ को सुधारने में मदद करता है।

– अगर आप पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए काजल की तासीर ठंडी होती है। हमारी आंखे पित्त दोष से जुड़ी होती हैं। ऐसे में काजल लगाने से सिरदर्द और चिड़चिड़ापन कम हो जाता है। यह पीरियड्स से पहले शरीर में बढ़ रही हीट को कम करने में मदद करता है।

– मोती से बनी ज्वैलरी को ठंडक देने वाली और मानसिक शांति बढ़ाने वाली माना जाता है। जिन महिलाओं को अक्सर चिड़चिड़ापन, मूड में उतार-चढ़ाव या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, उनके लिए इसे पहनना फायदेमंद माना जाता है। माना जाता है कि यह पीएमएस से जुड़े लक्षणों को संतुलित करने में भी मदद कर सकती है।

– चूड़ियों से कलाई पर हल्का प्रेशर पड़ता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है।

– नाभि के नीचे चांदी के गहने पहनती है, तो इससे हैवी ब्लीडिंग कम होती है। इसके साथ ही, शरीर की अतिरिक्त हीट भी दूर होती है और पीएमएस के लक्षण कम होते हैं।

– अगर नाभि से ऊपर सोने के गहने पहनें तो काफी फायदेमंद होता है। इससे शरीर को ताकत और पोषण मिलता है।

– वहीं, नथ पहनने से रिप्रोडक्टिव हेल्थ बैलेंस करती है।

– सिंदूर और मांग टीका भी हार्मोनल और इमोशनल बैलेंस में मदद करता है।

(साभार – प्रभासाक्षी)

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