Friday, March 13, 2026
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भीम चूल्हा…जिस पर अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने बनाया भोजन

झारखंड का जंगलों-पहाड़ों से घिरा पलामू क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों से परिपूर्ण है। इसी क्षेत्र में हुसैनाबाद अनुमंडल का मोहम्मदगंज भी शामिल है। यहीं पर है पौराणिक भीम चूल्हा स्थित है । किवदंतियों के अनुसार यह वही 5 हजार साल पुराना चूल्हा है, जिस पर पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम भोजन बनाया करते थे। कोयल नदी के तट पर शिलाखंडों से बना यह चूल्हा पांडवों के इस इलाके में ठहराव का मूक गवाह है।


प्रसिद्ध भीम चूल्हा मोहम्मद गंज बराज के पास अवस्थित है| पर्यटन स्थल के रूप में सैलानी एक साथ दोनों जगहों का भ्रमण कर आनंदित होते हैं। भीम चूल्हा के बगल में पहाड़ी के पास पत्थर की तराशा हुआ हाथी भी दर्शनीय है जिसकी लोग अपने श्रद्धा के अनुसार पूजा पाठ भी करते है। बरवाडी से डेहरी भारतीय रेल लाइन भी भीम चूल्हा के नीचे से होकर गुजरती है।


भीम द्वापर युग में सबसे ज्यादा बलवान थे। उनके बल का अंदाजा इस चूल्हे को देख लगाया जा सकता है। बता दें कि झारखंड के पलामू जिले में एक ऐसा स्थान है, जहां द्वापर से जुड़ी कई निशानी देखने को मिलती है। इसमें एक निशानी ऐसी है, जिसके नाम से इस स्थान को जाना जाता है। पलामू के मोहमादगंज प्रखंड में एक स्थान भीम चूल्हा के नाम से प्रसिद्ध है। ये एक पर्यटक स्थल है।

यहां दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं। पलामू जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर मोहमादगंज प्रखंड में यह स्थान है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांच पांडव माता कुंती के साथ झारखंड में इस स्थान पर रहा करते थे। इस दौरान वो यहां खाना पकाया करते थे। खाना पकाने के लिए भीम ने 170 टन का चूल्हा तैयार किया था। पुजारी गंगा तिवारी ने बताया कि यहां सैकड़ों वर्ष पुराना शिव मंदिर है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं। 14 जनवरी को यहां मेले का आयोजन होता है। इस अवसर पर हजारों लोग आते हैं।

मान्यता है कि मंदिर में मांगी हुई श्रद्धालुओं की हर मुराद पूरी होती है। यहां पूजा करने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। पांचों पांडव से जुड़ी कई निशानी देखने को मिलती है। मंदिर के नीचे एक गुफा छिपा है, जिसकी गहराई का पता आज तक कोई नहीं लगा पाया। लोग बताते हैं कि उसी गुफा में पांच पांडव माता कुंती के साथ रहा करते थे। इसके अलावा उनके साथ एक हाथी भी था। मान्यता है कि युग बदलने के बाद वह पत्थर का बन गया।

भीम चूल्हा को पर्यटक विभाग द्वारा विकसित किया गया है। इसके साथ यहां पार्क, वॉच टावर और चूल्हे के ऊपर कराह बनाया गया है, ताकि लोग देख-समझ सकें कि इस चूल्हे पर माता कुंती द्वारा खाना बनाया गया होगा। इसके साथ यहां से प्रकृति का खूबसूरत नजारा और भीम बराज देखने को मिलता है। वॉच टावर से पुरा नजारा बेहद खूबसूरत दिखता है।

(साभार – नवभारत टाइम्स एवं न्यूज 18)

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