– अलका सरावगी और जॉन वाटर के साथ बातचीत
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के रीडर्स क्लब की ओर से साहित्यकार ,लेखक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हिंदी लेखिकाअलका सरावगी के उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए ‘के अंग्रेजी अनुवाद पर महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया । इस उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद यूएसए और सिंगापुर निवासी अनुवादक संपादक और लेखक जॉन वाटर ने रजिस्टर मी एस कुल भूषण के रूप में किया । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के रीडर्स क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम लेखक से रूबरू में लेखिका के साथ अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर प्रो चंपा श्रीनिवासन ने एंकरिंग और स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण विषय बताया जिसमें बंगलादेश के विभाजन को लेकर उपन्यास लिखा गया है।
उपन्यासकार अलका सरावगी और अनुवादक जॉन वाटर के साथ उपन्यास पर मोडरेडर के रूप में डॉ वसुंधरा मिश्र और डॉक्टर देविना गुप्ता ने विभिन्न प्रश्नों के द्वारा उपन्यास की विषयवस्तु और कथा पर चर्चा की।
मोडरेटर डॉ वसुंधरा मिश्र ने हिंदी और डॉक्टर देविना गुप्ता ने अंग्रेजी में प्रश्नोत्तर किए।
अलका सरावगी ने कहा यह एक ऐसी कथा है जिसे लिखने के लिए मेरा मन बहुत छटपटा रहा था । लाखों लोगों का पलायन,विभाजन,रिफ्यूजी कैंप, मुक्ति संग्राम और विस्थापन का जीवन 1947 से 1971तक बंगाल में रहा । उपन्यास का नायक कुलभूषण जैन घर,देश और अपने परिवार से टूट कर अपनी पहचान को अपने जीवन के छह दशकों के बीतने के बाद भी खोजता रहा।उसका नाम गोपाल चंद्र दास ही उसकी पहचान बन गई थी। मारवाड़ी धनी परिवार का लड़का अपनी पहचान के लिए छटपटाता है।जड़ों से उखड़े हुए,स्त्रियों, बच्चों और युवाओं पर अत्याचार की पराकाष्ठा और उसी में मनुष्य की आशा और उम्मीद की किरणें भी जगाता है कुलभूषण।
हिंदी में बंगाल के विभाजन को लेकर संभवतः यह पहला उपन्यास है।
जॉन वाटर ने कहा अनुवादक के तौर पर मैंने उपन्यास की बारीकियों को अंग्रेजी में अनुवाद करने का भरसक प्रयास किया है, संभवत पाठकों को मेरा अनुवाद अच्छा लगेगा। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए।
कॉलेज के डायरेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह और प्रातः कालीन कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी के आयोजन और संयोजन में रीडर्स क्लब का यह कार्यक्रम हमें पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि उपन्यास सभी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह मानवी संवेदनाओं के साथ उनकी भावनाओं को दर्शाता है। विभाजन के दौरान होने वाले कष्ट ,दर्द और बेसहारा असहनीय जीवन को किस तरह एक अनजान देश में पुनर्वास किया यह उपन्यास उसी को दर्शाता है।
प्रातः कालीन सत्र कॉमर्स विभाग की वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और प्रो दिलीप शाह ने कोलेज मोमेंट प्रदान किया। दोनों अतिथियों का स्वागत किया और हार्दिक शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी सेशन में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी प्रश्न किया जिनका उत्तर दोनों लेखकों ने दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टिव के छात्र द्वारा गिटार पर जिंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं गीत गाया जो बहुत ही पसंद किया गया।इस अवसर पर कला संकाय की प्रिंसिपल डॉ देवजानी गांगुली ने भी अपना वक्तव्य रखा और लेखकों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की व्यवस्था में तेरह विद्यार्थी वोलेंटियर्स ने भाग लिया। धन्यवाद दिया प्रो चंपा श्रीनिवासन ने। कार्यक्रम की जानकारी दी डा वसुंधरा मिश्र ने।




