Saturday, March 14, 2026
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 केदारनाथ सिंह को याद करते हुए

 निशांत
 पहली बार
कहाँ देखा था केदारनाथ सिंह को
कोलकाता के ठनठनियों काली मंदिर के पास
एक गोरा-गारा ठिगना आदमी
चला जा रहा था दो-चार लोगों के साथ
“यही केदारनाथ सिंह हैं।
हिंदी के सबसे बड़े कवि।”
मित्र प्रकाश ने कहा था
“नहीं, एशिया के सबसे बड़े कवि।”
पत्रकार कृपाशंकर चौबे ने कहा था
हम
अभिभूत थे
क़िताबों से निकलकर
एक सच्ची-मुच्ची आदमी खड़ा था
हमारे बीच
थोड़ा सा छूकर
देखना चाहते थे उन्हें हम
चाहते थे
हो जाए एक फ़ोटो
उनके साथ
बड़े होने के बाद
एक बार बचपन फिर आ गया था हमारे अंदर
तुम्हारे कारण
धन्यवाद,केदारनाथ सिंह!
धन्यवाद!
शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

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