कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं पर आधारित आलोचनात्मक पुस्तक का लोकार्पण

 

कोलकाता के “भारतीय संस्कृति संसद” के सभागार में युवा आलोचक मृत्युंजय पांडेय की 90 के बाद के प्रमुख कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं पर छपी आलोचनात्मक पुस्तक “कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव” का विमोचन मॉरिशस के प्रसिद्ध लेखक ‘राज हीरामन’ जी द्वारा किया गया| कार्यक्रम दो भागों में विभाजित की गई थी जहां पहले सत्र में मॉरिशस के प्रसिद्ध के लेखक राज हीरामन द्वारा “मॉरिशस में हिन्दी की दशा और दिशा” विषय पर व्याख्यान दिया गया| हीरामन जी ने मॉरिशस में हिन्दी की महत्ता एंव मजबूती को बताया साथ ही यह भी बताया कि मॉरिशस में हिन्दी सत्ता की ,राजनीति, समाज ,अर्थिक एंव धार्मिक जगत की भाषा है| हिन्दी नहीं भोजपूरी वहां कि भाषा थी फिर भी उन्होनें हिन्दी को ही महत्ता दी| गोरे अर्थात् अंग्रेज वहां अब शक्तिहीन हो गए हैं|हिन्दी भारत में तस्तरी पर परोसी गई है परन्तु मॉरिशस में यह संघर्ष करके प्राप्त हुई है| मॉरिशस के प्रधानमंत्री,नेता,सांसद तथा शासन के लगभग सभी लोग हिन्दी बोलने वाले ही हैं| हिन्दी न आने के कारण अंग्रेज विपक्ष में बैठे हैं |  दूसरे सत्र में युवा आलोचक मृत्युंजय पांडेय की पुस्तक “कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव” को लोकार्पण किया गया|इस पुस्तक की फ्लैप प्रोफेसर ‘अरूण होता’ द्वारा लिखा गया है|पुस्तक के लोकार्पण में प्रोफेसर अरूण होता, आलोचक आशुतोष सिंह, विट्ठलदास मुधड़ा आदि मंच पर उपस्थित थें| प्रोफेसर अरूण होता जी लेखक मृत्युंजय पांडेय को बधाई देते हुए अपने भाषण में पुस्तक की सराहना करते गुए कहते हैं कि ’90 के बाद के महत्वपूर्ण युवा कवि पर केन्द्रीय पुस्तक लिखी है| मैनेजर पांडेय हो या अन्य आलोचक सभी ने अपने विचार रखें हैं| प्रायः सभी आलोचक कवि की कविताओं की कुछ संवेदनाओं को सामने रखकर इतिश्री मान लेते हैं|इस पुस्तक में आलोचक की रचना प्रतिभा का निदर्शन मिलता है|”From the text to the critic” जो वर्तमान आलोचना से लुप्त हो रहा है लेखक ने पूर्णतः अभिव्यक्त की है| इसकी यह खूबीभूमंडलीकरण, भोजपूरी , पर्यावरण, स्त्री के सभी आयाम से गुजर कर संगृहित किया है|

 

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