Saturday, September 12, 2026
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एआई से 1980 की फोटो बना रहे हैं तो हो जाएं सावधान!

अमरेश द्विवेदी

आजकल सोशल मीडिया पर 1980 के दशक जैसी विंटेज फोटो बनाने का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से पुरानी फिल्मों, कैमरा क्वालिटी और उस दौर के फैशन के अंदाज में बदलकर इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर कर रहे हैं। कुछ सेकंड में तैयार होने वाली ये तस्वीरें देखने में भले ही आकर्षक लगें, लेकिन इनके पीछे मौजूद डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी के जोखिमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

जरा सोचिए, आपने अपने मोबाइल से अपनी एक सामान्य फोटो चुनी और उसे किसी एआई ऐप या वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। कुछ ही सेकंड में आपकी तस्वीर 1980 के दशक की पुरानी और विंटेज फोटो में बदल जाती है। तस्वीर पसंद आती है और आप उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। इसके बाद लाइक और कमेंट का इंतजार शुरू हो जाता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि जिस फोटो को आपने कुछ सेकंड पहले किसी एआई ऐप या वेबसाइट पर अपलोड किया था, वह अब कहां है? क्या वह तस्वीर केवल आपके मोबाइल में वापस आई है या उस सर्वर पर भी स्टोर हुई है? क्या ऐप उसे कुछ समय बाद डिलीट करता है या लंबे समय तक अपने सिस्टम में रख सकता है? क्या उस फोटो का इस्तेमाल सेवा को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है? और सबसे अहम सवाल- आपकी फोटो के साथ आपकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है?

आज के डिजिटल दौर में चेहरे की तस्वीर केवल एक तस्वीर नहीं रह गई है। यह आपकी डिजिटल पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक लगातार विकसित हो रही है और कई ऑनलाइन सेवाएं फोटो और अन्य व्यक्तिगत डेटा के साथ काम करती हैं। यही वजह है कि किसी अनजान एआई ऐप या वेबसाइट पर अपनी फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा इस्तेमाल करने की शर्तों को समझना जरूरी है। अगर किसी सेवा की शर्तों में यह स्पष्ट नहीं है कि अपलोड की गई तस्वीर कितने समय तक रखी जाएगी, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा या उसे किन पक्षों के साथ साझा किया जा सकता है, तो सावधानी बरतना बेहतर है।

एआई तकनीक ने तस्वीरों और वीडियो को बदलना बेहद आसान बना दिया है। इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल करके डीपफेक भी बनाए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति के चेहरे को दूसरी तस्वीर या वीडियो में लगाकर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने में वास्तविक लग सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एआई ऐप पर फोटो अपलोड करते ही आपकी तस्वीर डीपफेक बन जाएगी। लेकिन इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आपकी तस्वीरों की संख्या जितनी ज्यादा होगी, उनका गलत इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी बढ़ सकता है। खासकर ऐसी तस्वीरों को लेकर ज्यादा सावधानी जरूरी है जिनमें चेहरा साफ दिखाई देता हो।

साइबर सुरक्षा का खतरा केवल फोटो अपलोड करने तक सीमित नहीं है। कई बार लोग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी ट्रेंड के पीछे भागते हुए अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं और फिर किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन दे देते हैं। अगर कोई ऐप फोटो एडिट करने के नाम पर कैमरा, गैलरी, कॉन्टैक्ट्स या अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मांग रहा है, तो एक बार जरूर सोचें कि उसे वास्तव में उस परमिशन की जरूरत क्यों है। हर परमिशन खतरनाक नहीं होती। उदाहरण के लिए, फोटो एडिटिंग ऐप को किसी तस्वीर तक पहुंच की जरूरत हो सकती है। लेकिन अगर किसी साधारण ऐप की मांग उसकी वास्तविक जरूरत से मेल नहीं खाती, तो परमिशन देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

फर्जी वेबसाइट से बचना भी जरूरी

साइबर अपराधी अक्सर वायरल ट्रेंड का फायदा उठाते हैं। किसी लोकप्रिय एआई फोटो ट्रेंड के नाम पर फर्जी वेबसाइट या ऐप तैयार किया जा सकता है और लोगों को वहां अपनी तस्वीर या व्यक्तिगत जानकारी अपलोड करने के लिए आकर्षित किया जा सकता है। कुछ मामलों में फर्जी वेबसाइटें यूजर से इंस्टाग्राम, फेसबुकया ईमेल का पासवर्ड डालने के लिए भी कह सकती हैं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है। किसी एआई फोटो टूल को इस्तेमाल करने के लिए अगर आपसे सोशल मीडिया का पासवर्ड मांगा जा रहा है, तो तुरंत रुकें और वेबसाइट की विश्वसनीयता की जांच करें। अनजान लिंक पर लॉगिन जानकारी दर्ज करना साइबर अपराधियों को आपका अकाउंट सौंपने जैसा हो सकता है।

एआई ट्रेंड अपनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

1980 के दशक की विंटेज फोटो बनाना अपने आप में गलत नहीं है। एआई का इस्तेमाल मनोरंजन और क्रिएटिविटी के लिए किया जा सकता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इसका इस्तेमाल समझदारी और सावधानी के साथ किया जाए। ऐप या वेबसाइट किस कंपनी की है, इसकी जानकारी जांचें। उसकी प्राइवेसी पॉलिसी जरूर पढ़ें। देखें कि आपकी फोटो कितने समय तक स्टोर की जा सकती है। यह समझें कि कंपनी आपके डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से करती है। अनजान या संदिग्ध ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन न दें। फर्जी वेबसाइट पर इंस्टाग्राम, फेसबुक या ईमेल का पासवर्ड कभी न डालें। ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर और रिव्यू की जांच करें। बेहद निजी या संवेदनशील तस्वीरें किसी अनजान एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचें। सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें सार्वजनिक करने से पहले प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करें। किसी भी वायरल लिंक पर आंख बंद करके क्लिक न करें।

एक छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी समस्या

डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा खतरा अक्सर तकनीक नहीं, बल्कि लापरवाही होती है। हम कई बार किसी ट्रेंड को देखकर बिना सोचे-समझे ऐप इंस्टॉल कर लेते हैं, फोटो अपलोड कर देते हैं या किसी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। एक तस्वीर अपलोड करने से तुरंत कोई साइबर अपराध हो जाएगा, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन अपनी डिजिटल पहचान और निजी डेटा को लेकर सावधानी बरतना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।

एआई हमारे लिए एक उपयोगी और शक्तिशाली तकनीक है। यह तस्वीरों को नया रूप दे सकती है, पुराने दौर की यादें वापस ला सकती है और मनोरंजन के नए तरीके दे सकती है। लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय यह याद रखना जरूरी है कि हर ऑनलाइन सुविधा के साथ डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

इसलिए अगली बार जब कोई 1980 की विंटेज फोटो वाला ट्रेंड आपके सामने आए, तो तस्वीर बनाने से पहले कुछ सेकंड रुककर जरूर सोचें—क्या यह ऐप भरोसेमंद है? मेरी फोटो कहां जाएगी? उसे कितने समय तक रखा जाएगा? और मैं अपनी निजी जानकारी किसके साथ साझा कर रहा हूं?

ट्रेंड कुछ दिनों में बदल जाएगा, लेकिन आपकी डिजिटल पहचान लंबे समय तक आपके साथ रहेगी। इसलिए एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा को नजरअंदाज करके नहीं।याद रखें-डिजिटल दुनिया में आपकी पहचान ही आपकी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है।

(साभार – हिन्दुस्थान समाचार)

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