सिर्फ 8 कोर्ट के सहारे चैंपियन गढ़ रहे गोपीचंद

हैदराबाद। पीवी सिंधू के रियो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने के बाद एक बार फिर पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन पुलैला गोपीचंद की अकादमी चर्चा में है।

चार साल पहले लंदन ओलिंपिक में उनकी शिष्य रही साइना नेहवाल ने भी कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था। सभी जगह चर्चा है कि आखिर गोपीचंद अपने आठ कोर्ट की अकादमी इतने बढ़े सिंधू, साइना व श्रीकांत जैसे विश्वस्तीय खिलाड़ी तैयार कैसे करते है। 2012 के नेशनल चैंपियन और 2016 के उपविजेता सौरभ वर्मा विस्तार से अकादमी के बारे में जानकारी दी।

कड़ा अभ्यास सत्र – अकादमी में सीनियर खिलाड़ियों की पूरी बैच होती है। बैडमिंटन की प्रैक्टिस का समय सुबह 4.30 से 6.30 तक होता है। इसके बाद कुछ एक्सरसाइज के बाद 8.30 से 10 बजे तक फिर कोर्ट पर प्रैक्टिस की जाती है। प्रैक्टिस मैच पर जोर बुधवार और शनिवार को खिलाड़ियों के बीच प्रैक्टिस मैच खेले जाते है। इसका समय यह सुबह 7 बजे से 11 बजे तक निर्धारित है। मैच एकल व युगल होते है।

फिटनेस जरुरी है – शाम को 4 से 7 बजे तक फिटनेस ट्रेनिंग होती है, जिसमें कभी जिम में एक्सरसाइज और रंनिंग कराई जाती है। हर दिन के हिसाब से अलग-अलग कार्यक्रम तय किया जाता है।

न्यूट्रीशियन तय करते है खान-पान – अकादमी में खिलाड़ियों की प्रेक्टिस एक जैसी हो सकती है, लेकिन खान-पान सभी खिलाड़ियों का अलग-अलग होता है। हर खिलाड़ी के शरीर की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है किह उसे क्या डाइट दी जाए। इसके लिए न्यूट्रीशियनिस्ट है। प्रेक्टिस के दौरान फास्ट फूड, बिरयानी, आइसक्रीम आदि मना थी। सिंधू का घर वहीं है तो वह अपने घर जाती थी।

कैंप में सिर्फ 16-20 बच्चों दो-तीन एकड़ में अकादमी बनी है। वहां आठ कोर्ट हैं। कैंप के दौरान सिर्फ 16-20 बच्चे ही होते हैं। वैसे अकादमी में बहुत से बच्चे हैं।

 

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