पटना। अब न्यूरो यानी नसों व तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों से जूझ रहे मरीज के उपचार में सिर्फ चिकित्सक की नजर नहीं होंगी। सेंसर मशीन आपके हर कदम को माप कर बताएगी कि नसों में अभी कितनी कमजोरी शेष है।
जब रोगी इस सेंसर मशीन पर चलेंगे तो उनके कदमों की गति, लंबाई व समय को रिकार्ड कर वह दोनों पैरों की चाल में अंतर और असंतुलन की रिपोर्ट देगा।
दोनों पैरों में कितना भार पड़ रहा है, संतुलन कहां बिगड़ा, हाथ-पैर की गतिविधियों में कितना सुधार हुआ, चलने में लड़खड़ाहट, कमजोरी या लय में गड़बड़ी तो नहीं है, इसे डॉक्टर आसानी से समझ सकेंगे। इन तथ्यों के बाद हर रोगी के लिए और अधिक सटीक फिजियोथेरेपी तकनीक अपनाई जा सकेगी। डॉ. रत्नेश चौधरी व डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि इस तकनीक की मदद से घर पर रह रहे मरीज की गतिविधियों की निगरानी और उसके अनुसार फिजियोथेरेपी की योजना बनाना आसान होगा। उन्होंने बताया कि हड्डी-नस की समस्या, न्यूरोलाजिकल रोग, मोटापा और फिटनेस में फिजियोथेरेपी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रोबोटिक थेरेपी, वर्चुअल रियलिटी, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और टेली-रिहैबिलिटेशन ने न्यूरो रिहैब को नई तकनीक से जोड़ दिया है।




