दीपंकर एडबार
कृष्णनगर (नदिया) । दुर्गापूजा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही कृष्णनगर के प्रकाश कारीगरों की व्यस्तता बढ़ गई है। शहर के पूजा मंडपों के अलावा बदकुल्ला, नवद्वीप और आसपास के इलाकों से भी ऑर्डर मिलने के कारण कारीगर एक साथ कई काम पूरा करने में जुटे हैं। पंचमी से पहले अधिकांश मंडपों में रोशनी का काम पूरा करने के लिए कार्यशालाओं में देर रात तक काम चल रहा है।
इस बार पूजा की रोशनी में पारंपरिक सजावट के साथ तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा है। एलईडी, चेन लाइट, मूविंग लाइट और फानूस लाइट की मांग के साथ थीम आधारित लाइटिंग की मांग बढ़ी है। कई पूजा समितियां मंडप की थीम के अनुरूप विशेष डिजाइन चाहती हैं। कुछ जगहों पर संगीत के साथ तालमेल रखते हुए रोशनी के ऑन-ऑफ होने की व्यवस्था भी की जा रही है।
इस बदलाव का असर प्रकाश कारीगरों के काम करने के तरीके पर भी पड़ा है। अब केवल लाइट तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। मंडप की डिजाइन और थीम के अनुसार फ्रेम तैयार करना, विद्युत कनेक्शन की जांच करना, तैयार उपकरणों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाना और वहां जाकर इंस्टॉलेशन करना भी काम का हिस्सा बन गया है।
कृष्णनगर के प्रकाश कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, इस सीजन में शहर के बाहर से मिलने वाले ऑर्डर ने बाजार का दायरा बढ़ाया है। इससे लाइट बनाने वाले कारीगरों के साथ फ्रेम तैयार करने वाले श्रमिकों, इलेक्ट्रीशियन, परिवहन कर्मियों और इंस्टॉलेशन टीमों को भी अतिरिक्त काम मिल रहा है। आवश्यक कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा कोलकाता से मंगाया जाता है, जबकि डिजाइन और तैयार करने का काम स्थानीय स्तर पर होता है।
हालांकि बढ़ते ऑर्डर के साथ समय का दबाव भी बढ़ा है। एक ही समय में कई पूजा मंडपों का काम पूरा करने के लिए कारीगरों को दिन-रात काम करना पड़ रहा है। तैयार रोशनी को अलग-अलग इलाकों में भेजने के साथ वहां इंस्टॉलेशन के लिए टीम भी रवाना की जा रही है।
प्रकाश कारीगरों का कहना है कि पूजा समितियों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब सामान्य रोशनी के बजाय अलग और आकर्षक डिजाइन की मांग अधिक है। इससे एक ओर स्थानीय प्रकाश कारोबार को नया बाजार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कम समय में अधिक काम पूरा करने की चुनौती भी बढ़ गई है।
पूजा का समय नजदीक आने के साथ कृष्णनगर की कार्यशालाओं में अब अंतिम दौर की तैयारी चल रही है। लक्ष्य स्पष्ट है-पंचमी से पहले अधिकतम ऑर्डर पूरा कर रोशनी को विभिन्न पूजा मंडपों तक पहुंचाना।




